How Much You Need To Expect You'll Pay For A Good नवरात्रि में रखें बिना डर के उपवास



हैं कि सोने से पहले कीवी खाने से गहरी नींद में बिताया गया समय बढ़ सकता

अनार शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसको खाने से स्किन चमकदार बनने के साथ स्किन की झुर्रियां भी आसानी से दूर होती हैं। अनार में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो बढ़ती उम्र के निशानों को भी स्किन पर आने से रोकते हैं। अनार में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद करता हैं।

यह त्वचा पर झुर्रियों को कम करने में मदद करता है.

बालतोड़ के कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार

प्रुरिटोसेप्टिव खुजली : इस खुजली के लिए अक्सर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श किया जाता है। यह खुजली सूजन या किसी स्किन डैमेज के कारण हो सकती है। यह बढ़ती उम्र या स्किन एलर्जी के कारण भी हो सकती है।

यदि आपके पास शहद उपलब्ध नहीं है तो खाली दही भी सही रहेगा. हड्डियों को मजबूत बनाता है दही

उगाया जाता है

डर्मेटाइटिस (त्वचा पर लाल व खुजलीदार चकत्ते)

अगर आप इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप इसको पाउडर के रूप में बाज़ार से खरीद भी सकते हैं लेकिन अगर घर पर इसे बनाना चाहते हैं तो आप इसे बना भी सकते हैं। इसे पाउडर बनाने के लिए सबसे पहले आपको गुड़हल के फूल को पानी से अच्छी तरह से धोना होगा उसके बाद आपको उस एक या दो दिन तक अच्छी तरह से धूप में सुखना है। जब वह सुख जाता है तब उसको मिक्सी की सहायता से अच्छी तरह से पीस लेना है ध्यान रहे कि आपको उसको पूरी तरह सुखाना है उसमे किसी तरह कि नमी मौजूद नहीं होना चाहिए। इस तरह से आप कभी भी गुड़हल का पाउडर बना सकते हैं। चलिए आगे इसके कुछ अलग अलग नामों के बारे में जानते हैं कि इसे क्या क्या नाम से जाना जाता है।

पोटैशियम का एहम भूमिका होती है

नवरात्र के दौरान जौ बोने की परंपरा तो सदियों पुरानी है. लेकिन इसके साथ ही कुछ और बातें भी जुड़ी हैं। मसलन जौ जातक के भविष्‍य में आने वाले संकेतों को भी दर्शाती है. ऐसा कहा जाता है कि जौ जितने बड़े उगते हैं, उतनी ही कृपा मां दुर्गा की हम पर होती है.

न्यूरोपैथिक खुजली : इस प्रकार की खुजली केंद्रीय या पेरिफेरल न्यूरॉन्स (नर्वस सिस्टम से जुड़ा) को क्षति पहुंचने के कारण होती है। यह खुजली तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकारों जैसे पैरेस्थेसिया (हाथों में लगातार सुई चुभने जैसा एहसास) के कारण read more हो सकती है। यह विकार कई बार खुजली के साथ दर्द का भी कारण बन सकते हैं।

नवरात्रि का त्योहार अश्विन (शरद) या चैत्र (वसंत) की शुरुआत में प्रार्थना और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

नवरात्रि आपकी आत्मा के विश्राम का समय है। यह वह समय है जिसमें आप खुद को सभी क्रियाओं से अलग कर लेते हैं और खुद में ही विश्राम करते हैं।

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